Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.3 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.3

11.3
एवमेतद्यथात्थ त्वमात्मानं परमेश्वरम् । द्रष्टुमिच्छाम्यहं रूपमैश्वरं पुरुषोत्तम ॥ ११-३ ॥
evametadyathāttha tvamātmānaṃ parameśvaram | draṣṭumicchāmyahaṃ rūpamaiśvaraṃ puruṣottama || 11-3 ||
— यह ऐसा ही है जैसा आप कहते हैं ; — अपने को परमेश्वर ; — मैं उस रूप को देखना चाहता हूँ ; — ऐश्वर्ययुक्त, हे पुरुषोत्तम

हे पुरुषोत्तम, आप जैसा अपने को परमेश्वर कहते हैं, वह ऐसा ही है; मैं आपके ऐश्वर्ययुक्त रूप को देखना चाहता हूँ।