Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.2 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.2

11.2
भवाप्ययौ हि भूतानां श्रुतौ विस्तरशो मया । त्वत्तः कमलपत्राक्ष माहात्म्यमपि चाव्ययम् ॥ ११-२ ॥
bhavāpyayau hi bhūtānāṃ śrutau vistaraśo mayā | tvattaḥ kamalapatrākṣa māhātmyamapi cāvyayam || 11-2 ||
— भूतों की उत्पत्ति और प्रलय ; — मैंने विस्तार से सुने ; — आपसे, हे कमलनयन ; — और अव्यय महिमा भी

हे कमलनयन, भूतों की उत्पत्ति और प्रलय को मैंने आपसे विस्तार से सुना है, और आपकी अव्यय महिमा को भी।