Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 10.27 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)10.27

10.27
उच्चैः श्रवसमश्वानां विद्धि माममृतोद्भवम् । ऐरावतं गजेन्द्राणां नराणां च नराधिपम् ॥ १०-२७ ॥
uccaiḥ śravasamaśvānāṃ viddhi māmamṛtodbhavam | airāvataṃ gajendrāṇāṃ narāṇāṃ ca narādhipam || 10-27 ||
— अश्वों में उच्चैःश्रवा ; — मुझे जान, अमृत से उत्पन्न ; — गजेन्द्रों में ऐरावत ; — और मनुष्यों में राजा

अश्वों में मुझे अमृत से उत्पन्न उच्चैःश्रवा जान, गजेन्द्रों में ऐरावत, और मनुष्यों में राजा।