Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 10.23 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)10.23

10.23
रुद्राणां शङ्करश्चास्मि वित्तेशो यक्षरक्षसाम् । वसूनां पावकश्चास्मि मेरुः शिखरिणामहम् ॥ १०-२३ ॥
rudrāṇāṃ śaṅkaraścāsmi vitteśo yakṣarakṣasām | vasūnāṃ pāvakaścāsmi meruḥ śikhariṇāmaham || 10-23 ||
— रुद्रों में शंकर भी हूँ ; — यक्षों-राक्षसों में कुबेर (वित्तेश) ; — वसुओं में अग्नि भी हूँ ; — शिखरों में मेरु हूँ

मैं रुद्रों में शंकर हूँ, यक्षों और राक्षसों में कुबेर (वित्तेश) हूँ, वसुओं में अग्नि हूँ, और शिखरों (पर्वतों) में मेरु हूँ।