Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 10.24 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)10.24

10.24
पुरोधसां च मुख्यं विद्धि पार्थ ! बृहस्पतिम् । सेनान्यामप्यहं स्कन्दः सरसामस्मि सागरः ॥ १०-२४ ॥
purodhasāṃ ca mukhyaṃ viddhi pārtha ! bṛhaspatim | senānyāmapyahaṃ skandaḥ sarasāmasmi sāgaraḥ || 10-24 ||
— पुरोहितों में मुख्य जान ; — हे पार्थ, बृहस्पति ; — सेनापतियों में भी मैं स्कन्द ; — जलाशयों में सागर हूँ

हे पार्थ, पुरोहितों में मुझे मुख्य बृहस्पति जान; सेनापतियों में मैं स्कन्द हूँ, और जलाशयों में सागर हूँ।