Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 1.14 / 47

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)1.14

1.14
ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ । माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः ॥ १-१४ ॥
tataḥ śvetairhayairyukte mahati syandane sthitau | mādhavaḥ pāṇḍavaścaiva divyau śaṅkhau pradadhmatuḥ || 1-14 ||
— तब ; — श्वेत अश्वों से जुते हुए ; — विशाल रथ में ; — बैठे (दोनों) ; — माधव (कृष्ण) ; — और पाण्डुपुत्र (अर्जुन) ; — दो दिव्य शङ्ख ; — दोनों ने बजाए

तब श्वेत अश्वों से जुते हुए विशाल रथ में बैठे माधव (कृष्ण) और पाण्डुपुत्र (अर्जुन) ने अपने दिव्य शङ्ख बजाए।