The Great Liberation Tantra· 3.6 / 153

The Great Liberation Tantra3.6

3.6
ज्ञेयं भवति तद्ब्रह्म सच्चिद्विश्वमयं परम् । तथा तत्त्वस्वरूपेण लक्षणैर्वा महेश्वरि ॥६॥
jñeyaṃ bhavati tadbrahma saccidviśvamayaṃ param | tathā tattvasvarūpeṇa lakṣaṇairvā maheśvari ||6||
— जानने योग्य ; — है ; — वह ब्रह्म ; — सत्, चित् और विश्वमय ; — परम ; — इसी प्रकार ; — अपने तत्त्व-स्वरूप से ; — अथवा लक्षणों से ; — हे महेश्वरि

हे महेश्वरि, वह सत्, चित् और विश्वमय परम ब्रह्म जानने योग्य है — या तो (अपने) तत्त्व-स्वरूप से, या लक्षणों के द्वारा।