The Great Liberation Tantra· 3.7 / 153

The Great Liberation Tantra3.7

3.7
सत्तामात्रं निर्विशेषमवाङ्मनसगोचरम् । असत्त्रिलोकीसद्भानं स्वरूपं ब्रह्मणः स्मृतम् ॥७॥
sattāmātraṃ nirviśeṣamavāṅmanasagocaram | asattrilokīsadbhānaṃ svarūpaṃ brahmaṇaḥ smṛtam ||7||
— मात्र सत्ता ; — निर्विशेष ; — वाणी और मन की पहुँच से परे ; — असत् त्रिलोकी की सत्-रूप प्रतीति ; — स्वरूप ; — ब्रह्म का ; — कहा गया है

मात्र सत्ता, निर्विशेष, वाणी और मन की पहुँच से परे, (वस्तुतः) असत् त्रिलोकी की सत्-रूप प्रतीति — यही ब्रह्म का स्वरूप कहा गया है।