The Great Liberation Tantra· 3.38 / 153

The Great Liberation Tantra3.38

3.38
तारेण तारहीनेन प्रत्येकं सकलं पदम् । युग्मयुग्मक्रमेणाऽपि मन्त्रोऽयं विविधो भवेत् ॥३८॥
tāreṇa tārahīnena pratyekaṃ sakalaṃ padam | yugmayugmakrameṇā'pi mantro'yaṃ vividho bhavet ||38||
— प्रणव से ; — प्रणव से रहित ; — प्रत्येक ; — सम्पूर्ण ; — पद ; — युग्म-युग्म के क्रम से भी ; — मन्त्र ; — यह ; — नाना प्रकार का ; — हो

प्रणव सहित या प्रणव से रहित, प्रत्येक सम्पूर्ण पद को अलग-अलग, तथा युग्म-युग्म के क्रम से भी (लेने पर) — यह मन्त्र अनेक प्रकार का हो जाता है।