The Great Liberation Tantra· 3.14 / 153

The Great Liberation Tantra3.14

3.14
सर्वमन्त्रोत्तमः साक्षाद्धर्मार्थकाममोक्षदः । नात्र सिद्धाद्यपेक्षाऽस्ति नारिमित्रादिदूषणम् ॥१४॥
sarvamantrottamaḥ sākṣāddharmārthakāmamokṣadaḥ | nātra siddhādyapekṣā'sti nārimitrādidūṣaṇam ||14||
— समस्त मन्त्रों में उत्तम ; — साक्षात् ; — धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाला ; — यहाँ नहीं ; — सिद्धि आदि की अपेक्षा है ; — अरि-मित्र आदि का दोष नहीं

यह समस्त मन्त्रों में उत्तम है, साक्षात् धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाला; इसमें न सिद्धि आदि की अपेक्षा है, न अरि-मित्र आदि का दोष।