The Great Liberation Tantra3.13
सन्धिक्रमेण मिलितः सप्तार्णोऽयं मनुर्मतः ।
तारहीनेन देवेशि षड्वर्णोऽयं मनुर्भवेत् ॥१३॥
sandhikrameṇa militaḥ saptārṇo'yaṃ manurmataḥ |
tārahīnena deveśi ṣaḍvarṇo'yaṃ manurbhavet ||13||
— सन्धि-क्रम से ; — संयुक्त ; — सप्त-अक्षर ; — यह ; — मन्त्र ; — माना गया ; — प्रणव से रहित ; — हे देवेशि ; — षट्-अक्षर ; — यह ; — मन्त्र ; — हो सन्धि-क्रम से संयुक्त यह सप्त-अक्षर मन्त्र माना गया है; हे देवेशि, प्रणव से रहित यह षट्-अक्षर मन्त्र हो जाता है।