The Great Liberation Tantra· 3.12 / 153

The Great Liberation Tantra3.12

3.12
प्रणवं पूर्वमुद्धृत्य सच्चित्पदमुदाहरेत् । एकं पदान्ते ब्रह्मेति मन्त्रोद्धारः प्रकीर्तितः ॥१२॥
praṇavaṃ pūrvamuddhṛtya saccitpadamudāharet | ekaṃ padānte brahmeti mantroddhāraḥ prakīrtitaḥ ||12||
— प्रणव (ॐ) को ; — पहले ; — उद्धार करके ; — 'सत्'-'चित्' पदों को ; — उच्चारण करे ; — 'एकम्' को ; — पदों के अन्त में ; — 'ब्रह्म' (इस प्रकार) ; — मन्त्र का उद्धार ; — कहा गया

पहले प्रणव (ॐ) का उद्धार करके 'सत्' और 'चित्' पदों का उच्चारण करे; पदों के अन्त में 'एकम्' और 'ब्रह्म' (कहे) — इस प्रकार मन्त्र का उद्धार कहा गया है (ॐ सच्चिदेकं ब्रह्म)।