The Great Liberation Tantra· 3.11 / 153

The Great Liberation Tantra3.11

3.11
तत्साधनं प्रवक्ष्यामि शृणुष्वावहिता प्रिये । तत्रादौ कथयाम्याद्ये मन्त्रोद्धारं महेशितुः ॥११॥
tatsādhanaṃ pravakṣyāmi śṛṇuṣvāvahitā priye | tatrādau kathayāmyādye mantroddhāraṃ maheśituḥ ||11||
— वह साधन ; — कहूँगा ; — सावधान होकर सुनो ; — हे प्रिये ; — उसमें सबसे पहले ; — कहता हूँ, हे आद्ये ; — मन्त्र के उद्धार को ; — महेश के

वह साधन मैं कहूँगा; हे प्रिये, सावधान होकर सुनो। हे आद्ये, उसमें सबसे पहले मैं महेश के मन्त्र का उद्धार कहता हूँ।