The Great Liberation Tantra· 3.10 / 153

The Great Liberation Tantra3.10

3.10
स्वरूपबुद्ध्या यद्वेद्यं तदेव लक्षणैः शिवे । लक्षणैराप्तुमिच्छूनां विहितं तत्र साधनम् ॥१०॥
svarūpabuddhyā yadvedyaṃ tadeva lakṣaṇaiḥ śive | lakṣaṇairāptumicchūnāṃ vihitaṃ tatra sādhanam ||10||
— स्वरूप-बुद्धि से ; — जो जानने योग्य ; — वही ; — लक्षणों से ; — हे शिवे ; — लक्षणों से पाने की इच्छा करने वालों के लिए ; — विहित ; — वहाँ ; — साधन

हे शिवे, जो स्वरूप-बुद्धि से जानने योग्य है, वही लक्षणों से (जानने योग्य) है; लक्षणों के द्वारा (उसे) पाने की इच्छा करने वालों के लिए वहाँ साधन विहित है।