The Great Liberation Tantra· 3.9 / 153

The Great Liberation Tantra3.9

3.9
यतो विश्वं समुद्भूतं येन जातञ्च तिष्ठति । यस्मिन् सर्वाणि लीयन्ते ज्ञेयं तद्ब्रह्म लक्षणैः ॥९॥
yato viśvaṃ samudbhūtaṃ yena jātañca tiṣṭhati | yasmin sarvāṇi līyante jñeyaṃ tadbrahma lakṣaṇaiḥ ||9||
— जिससे ; — विश्व ; — उत्पन्न हुआ ; — जिससे ; — और उत्पन्न होकर ; — स्थित रहता है ; — जिसमें ; — सब ; — लीन होते हैं ; — जानने योग्य ; — वह ब्रह्म ; — लक्षणों से

जिससे विश्व उत्पन्न हुआ, जिससे उत्पन्न होकर स्थित रहता है, और जिसमें सब लीन होते हैं — वह ब्रह्म लक्षणों से जानने योग्य है।