The Great Liberation Tantra· 2.10 / 54

The Great Liberation Tantra2.10

2.10
सर्वैर्वेदैः पुराणैश्च स्मृतिभिः संहितादिभिः । प्रतिपाद्योऽस्मि नान्योऽस्ति प्रभुर्जगति मां विना ॥१०॥
sarvairvedaiḥ purāṇaiśca smṛtibhiḥ saṃhitādibhiḥ | pratipādyo'smi nānyo'sti prabhurjagati māṃ vinā ||10||
— समस्त वेदों के द्वारा ; — और पुराणों के द्वारा ; — स्मृतियों के द्वारा ; — संहिता आदि के द्वारा ; — प्रतिपाद्य ; — मैं हूँ ; — और कोई नहीं ; — है ; — प्रभु ; — जगत् में ; — मुझे ; — बिना

समस्त वेदों, पुराणों, स्मृतियों और संहिता आदि के द्वारा प्रतिपाद्य मैं ही हूँ; मेरे बिना जगत् में और कोई प्रभु नहीं है।