The Great Liberation Tantra· 2.11 / 54

The Great Liberation Tantra2.11

2.11
आमनन्ति च ते सर्वे मत्पदं लोकपावनम् । मन्मार्गविमुखा लोकाः पाषण्डा ब्रह्मघातिनः ॥११॥
āmananti ca te sarve matpadaṃ lokapāvanam | manmārgavimukhā lokāḥ pāṣaṇḍā brahmaghātinaḥ ||11||
— प्रतिपादन करते हैं ; — और ; — वे ; — सब ; — मेरे पद का ; — लोक को पवित्र करने वाले ; — मेरे मार्ग से विमुख ; — लोग ; — पाखण्डी ; — ब्रह्मघाती

और वे सब लोक को पवित्र करने वाले मेरे पद का प्रतिपादन करते हैं। मेरे मार्ग से विमुख लोग पाखण्डी और ब्रह्मघाती हैं।