The Great Liberation Tantra2.12
अतो मन्मतमुत्सृज्य यो यत् कर्म समाचरेत् ।
निष्फलं तद्भवेद्देवि कर्ताऽपि नारकी भवेत् ॥१२॥
ato manmatamutsṛjya yo yat karma samācaret |
niṣphalaṃ tadbhaveddevi kartā'pi nārakī bhavet ||12||
— अतः ; — मेरे मत को ; — छोड़कर ; — जो ; — जो ; — कर्म ; — करे ; — निष्फल ; — वह ; — होगा ; — हे देवि ; — कर्ता ; — भी ; — नरकगामी ; — होगा अतः हे देवि, मेरे मत को छोड़कर जो जो कर्म करता है, वह निष्फल होता है, और कर्ता भी नरकगामी हो जाता है।