The Great Liberation Tantra· 1.20 / 72

The Great Liberation Tantra1.20

1.20
तदुक्तयोगयज्ञाद्यैः कर्मभिर्भुवि मानवाः । देवान् पितॄन् प्रीणयन्तः पुण्यशीलाः कृते युगे ॥२०॥
taduktayogayajñādyaiḥ karmabhirbhuvi mānavāḥ | devān pitṝn prīṇayantaḥ puṇyaśīlāḥ kṛte yuge ||20||
— उनमें कहे गए योग, यज्ञ आदि के द्वारा ; — कर्मों के द्वारा ; — पृथ्वी पर ; — मनुष्य ; — देवों को ; — पितरों को ; — तृप्त करते हुए ; — पुण्यशील ; — कृत युग में ; — युग में

कृत युग में, उनमें कहे गए योग, यज्ञ आदि कर्मों के द्वारा पृथ्वी पर मनुष्य देवों और पितरों को तृप्त करते हुए पुण्यशील रहते थे।