— अमूल, मूल-रहित (कर्म कारक); — मूल-नाडियों के (षष्ठी बहुवचन — समासगत); — वायु से पूर्ण (समासगत विशेषण); — सुषुम्ना का (कर्म कारक स्त्रीलिङ्ग); — द्वादशान्त में स्थित (समासगत विशेषण); — ध्यान करके (क्त्वान्त); — अमूल (परम) भैरव को प्राप्त होता है — कर्म + वर्तमान काल
मूल-नाडियों के मूल (आधार)-रहित मूल, वायु से पूर्ण, द्वादशान्त में स्थित सुषुम्ना का ध्यान करके (साधक) अमूल (मूल-रहित, परम) भैरव को प्राप्त होता है। (धारणा ४४)