— जिस-जिस प्रकार से (अव्यय-युग्म); — उपदेश के द्वारा (करण कारक); — किया जाता है (कर्मवाच्य वर्तमान); — मरुतों (प्राण-वायुओं) का लय (कर्ता कारक — समासगत); — उसी-उसी प्रकार (अव्यय-युग्म); — मन को जानना चाहिए (कर्म + विधि लिङ् + विशेषण); — उस अवस्था के पद को प्राप्त होता है — कर्म + वर्तमान काल — समासगत
जिस-जिस प्रकार के उपदेश से मरुत् (प्राण-वायुओं) का लय किया जाता है, उसी-उसी प्रकार मन को (लय-योग्य) जानना चाहिए; (तब साधक) उसी अवस्था के पद को प्राप्त होता है। (धारणा ४३)