— निराधार (कर्म कारक नपुंसक); — संशय से रहित (विशेषण); — ख्याति (द्वैत-संज्ञान) से रहित (समासगत विशेषण); — वह परम ब्रह्म (कर्म कारक); — कहा गया है (कर्मवाच्य भूत कृदन्त); — भावना करे (विधि लिङ्); — तन्मय, तद्रूप हो जाता है — कर्ता + विधि लिङ्
निराधार, संशय-रहित, ख्याति (नाम-निर्देश/द्वैत-संज्ञान) रहित — वह परम ब्रह्म कहा गया है; उसकी भावना करे, (तब) तन्मय (तद्रूप) हो जाता है। (धारणा ४२)