vastvantare vedyamāne sarvavastuṣu śūnyatā |
tām eva manasā dhyātvā vidito'pi praśāmyati
anuṣṭubh
— किसी एक वस्तु में (अधिकरण कारक); — ज्ञात होने पर (सति-सप्तमी); — सब वस्तुओं में (अधिकरण बहुवचन — समासगत); — शून्यता (कर्ता कारक); — उसी (शून्यता) को (कर्म कारक स्त्रीलिङ्ग); — मन से ध्यान करके (करण + क्त्वान्त); — विदित (ज्ञेय) भी प्रशान्त हो जाता है — कर्ता + क्रिया
किसी एक वस्तु के ज्ञात होने पर सब वस्तुओं में शून्यता (प्रतीत होती है); उसी (शून्यता) को मन से ध्यान करके — विदित (ज्ञेय) भी प्रशान्त हो जाता है। (धारणा ३५)