yatra yatra kathañcit tu kartṛkarmaviviktatā |
tatra tatra śivāvasthā vyāpakatvāt kva yāsyati
anuṣṭubh
— जहाँ-जहाँ (अव्यय-युग्म); — किसी भी प्रकार से (अव्यय); — कर्ता-कर्म का विवेक/पृथक्करण (कर्ता कारक — समासगत); — वहाँ-वहाँ (अव्यय-युग्म); — शिव-अवस्था (कर्ता — समासगत); — व्यापकता के कारण (अपादान कारक); — कहाँ जा सकेगी? (प्रश्न + भविष्यत्)
जहाँ-जहाँ किसी भी प्रकार से कर्ता और कर्म का विवेक (पृथक्करण/अनासक्ति) हो, वहाँ-वहाँ शिव-अवस्था (विद्यमान) है — (शिव की) व्यापकता के कारण वह कहाँ जा सकती है?