कामिनः कामनावेगाद्विस्मयो योगिनां मतः ।
स्वशरीराह्लादशक्तिर्जायते परमेश्वरी ॥१०४॥
kāminaḥ kāmanāvegād vismayo yogināṃ mataḥ |
svaśarīrāhlādaśaktir jāyate parameśvarī
anuṣṭubh
कामी पुरुष के काम-वेग से उत्पन्न (जैसा) विस्मय होता है, वैसा ही (विस्मय) योगियों का माना गया है; (तब) अपने शरीर में आह्लाद-शक्ति परमेश्वरी के रूप में उत्पन्न होती है। (धारणा ८१)