तच् च शुद्धं विमर्श एव अप्रतियोगि स्वात्मचमत्काररूपो ऽहम् इति
Transliteration (IAST)
tac ca śuddhaṃ vimarśa eva apratiyogi svātmacamatkārarūpo 'ham iti
और वह शुद्ध (अहं-विमर्श) अप्रतियोगी (प्रतिपक्ष-रहित) विमर्श ही है, स्व-आत्म-चमत्कार-रूप 'अहम्' इस प्रकार।