The Essence of the Tantra· 7.9 / 28

The Essence of the Tantra7.9

7.9

तद् यथा जलं तेजो वायुर् नभः तन्मात्रपञ्चकाक्षैकादशगर्भो ऽहङ्कारश् चेति

Transliteration (IAST)

tad yathā jalaṃ tejo vāyur nabhaḥ tanmātrapañcakākṣaikādaśagarbho 'haṅkāraś ceti

— जल ; — तेज (अग्नि) ; — वायु ; — नभ (आकाश) ; — तन्मात्र-पञ्चक एवं ग्यारह इन्द्रियों को गर्भ में रखने वाला ; — अहङ्कार (अहं-कर्ता तत्त्व)

वे इस प्रकार: जल, तेज, वायु, नभ, तथा तन्मात्र-पञ्चक एवं ग्यारह इन्द्रियों को गर्भ में रखने वाला अहङ्कार।