तद् एवम् यद् उक्तं यागहोमादि तत् एवंविधे महेश्वर एव मन्तव्यम्
Transliteration (IAST)
tad evam yad uktaṃ yāgahomādi tat evaṃvidhe maheśvara eva mantavyam
अतः इस प्रकार जो याग, होम आदि कहे गये, वे इस प्रकार के महेश्वर के विषय में ही मन्तव्य (समझने योग्य) हैं।