किं तर्केणापि इति चेत् उक्तम् अत्र द्वैताधिवासनिरासप्रकार एव अयं न तु अन्यत् किञ्चिद् इति
Transliteration (IAST)
kiṃ tarkeṇāpi iti cet uktam atra dvaitādhivāsanirāsaprakāra eva ayaṃ na tu anyat kiñcid iti
(शंका) तो फिर तर्क से भी क्या? यदि ऐसा पूछा जाये तो (उत्तर) कहा जा चुका — यह केवल द्वैत के अधिवास (संस्कार) को दूर करने का प्रकार ही है, अन्य कुछ नहीं।