The Essence of the Tantra· 22.33 / 53

The Essence of the Tantra22.33

22.33

एतद् विसर्गधामनि परिमर्शनतस् त्रिधैव मनुवीर्यम् । तत्तत्संविद्गर्भे मन्त्रस् तत्तत्फलं सूते

Transliteration (IAST)

etad visargadhāmani parimarśanatas tridhaiva manuvīryam | tattatsaṃvidgarbhe mantras tattatphalaṃ sūte

— यह, विसर्ग-धाम में ; — परिमर्शन (विमर्श) से ; — मन्त्र का वीर्य त्रिविध ही ; — उन-उन संवित् के गर्भ में ; — मन्त्र उस-उस फल को प्रसूत करता है

इस विसर्ग-धाम में परिमर्शन से मन्त्र का वीर्य त्रिविध ही (होता है)। उन-उन संवित् के गर्भ में (स्थित) मन्त्र उस-उस फल को प्रसूत करता है।