The Essence of the Tantra· 13.26 / 101

The Essence of the Tantra13.26

13.26

तदासनत्वात् भगवन्नवात्मादीनां शक्तेर् एव च पूज्यत्वात् इति गुरवः

Transliteration (IAST)

tadāsanatvāt bhagavannavātmādīnāṃ śakter eva ca pūjyatvāt iti guravaḥ

— वे (शक्तियाँ) उसका आसन होने के कारण ; — भगवान् नवात्मा आदि का ; — शक्ति के ही पूज्य होने के कारण ; — गुरु (कहते हैं)

क्योंकि वे (शक्तियाँ) भगवान् नवात्मा आदि का आसन हैं, और शक्ति ही पूज्य है — ऐसा गुरु (कहते हैं)।