The Essence of the Tantra· 13.27 / 101

The Essence of the Tantra13.27

13.27

तत्र च पञ्च अवस्था जाग्रदाद्याः षष्ठी च अनुत्तरा नाम स्वभावदशा अनुसन्धेया

Transliteration (IAST)

tatra ca pañca avasthā jāgradādyāḥ ṣaṣṭhī ca anuttarā nāma svabhāvadaśā anusandheyā

— पाँच अवस्थाएँ ; — जाग्रत् आदि ; — छठी ; — अनुत्तरा नामक ; — स्वभाव-दशा (निज स्वरूप की दशा) ; — अनुसन्धेय — बोध में लाने योग्य

और वहाँ जाग्रत् आदि पाँच अवस्थाएँ, तथा अनुत्तर नामक छठी स्वभाव-दशा अनुसन्धेय (बोध में लाने योग्य) हैं।