Stanzas on the Divine Pulsation 2.6
अयमेवोदयस्तस्य ध्येयस्य ध्यायिचेतसि ।
तदात्मतासमापत्तिरिच्छतः साधकस्य या ॥६॥
ayam evodayas tasya dhyeyasya dhyāyi-cetasi |
tad-ātmatā-samāpattir icchataḥ sādhakasya yā ||
anuṣṭubh
— यह — पु.कर्ता एक. सर्वनाम ; — ही, निश्चय ही (निश्चयार्थक अव्यय) ; — उदय — उठान, प्रकटन (कर्ता कारक) ; — उसका — पु.षष्ठी एक. ; — ध्येय (ध्यान के विषय) का — षष्ठी एकवचन ; — ध्यायी (ध्यान करने वाले) के चित्त में (अधिकरण कारक — समासगत) ; — तदात्मता की समापत्ति — उससे एकत्व की प्राप्ति (कर्ता कारक — समासगत) ; — इच्छुक साधक का (षष्ठी एकवचन) ; — जो (समापत्ति, अवस्था) — स्त्री.कर्ता एक. सम्बन्धवाचक ध्येय (ध्यान-विषय) का ध्याता के चित्त में जो यह उदय (प्रकटन) है — वही इच्छुक साधक के लिए तदात्मता (उस से एकत्व) की समापत्ति (प्राप्ति) है।