Stanzas on the Divine Pulsation · 2.7

Stanzas on the Divine Pulsation 2.7

2.7
इयमेवामृतप्राप्तिरयमेवात्मनो ग्रहः । इयं निर्वाणदीक्षा च शिवसद्भावदायिनी ॥७॥
iyam evāmṛta-prāptir ayam evātmano grahaḥ | iyaṃ nirvāṇa-dīkṣā ca śiva-sad-bhāva-dāyinī ||
anuṣṭubh
— यह (समापत्ति) — स्त्री.कर्ता एक. ; — ही, निश्चय ही (निश्चयार्थक अव्यय) ; — अमृत-प्राप्ति — अमरता के अमृत की प्राप्ति (कर्ता कारक — समासगत) ; — यह — पु.कर्ता एक. सर्वनाम ; — ही, निश्चय ही (निश्चयार्थक अव्यय) ; — आत्मा का ग्रहण — आत्म-साक्षात्कार (कर्ता कारक) ; — यह (समापत्ति) — स्त्री.कर्ता एक. ; — निर्वाण-दीक्षा — मुक्ति में दीक्षा (कर्ता कारक — समासगत) ; — और (अव्यय) ; — शिव के सद्भाव (सत् स्वरूप) को प्रदान करने वाली (विशेषण, स्त्रीलिङ्ग — समासगत)

यही अमृत-प्राप्ति है, यही आत्मा का ग्रहण (आत्म-साक्षात्कार) है, और यही शिव के सद्भाव (सत् स्वरूप) को प्रदान करने वाली निर्वाण-दीक्षा है।