— ज्ञान और ज्ञेय (जानने योग्य) के स्वरूप वाली (के द्वारा) — करण कारक — समासगत; — परा (सर्वोच्च) शक्ति के साथ — करण कारक; — युक्त, सम्बद्ध (पु.कर्ता एक. ppp √यु); — दो पदों में (जाग्रत् और स्वप्न) — अधिकरण कारक — समासगत; — विभु — सर्वव्यापक, ईश्वर (कर्ता कारक); — प्रकाशित होता है, भासित होता है (वर्त. तृ.पु.एक. √भा); — उससे अन्यत्र (सुषुप्ति-तुरीय आदि में) — अव्यय; — किन्तु, परन्तु (विरोधार्थक अव्यय); — चिन्मात्र — केवल शुद्ध चैतन्य-रूप (कर्ता कारक — समासगत)
ज्ञान और ज्ञेय के स्वरूप वाली परा शक्ति से युक्त वह विभु (व्यापक प्रभु) दो पदों (जाग्रत्-स्वप्न) में भासित होता है; उनसे अन्यत्र (सुषुप्ति में) तो केवल चिन्मात्र (शुद्ध चैतन्य) रूप में।