Stanzas on the Divine Pulsation · 1.18

Stanzas on the Divine Pulsation 1.18

1.18
ज्ञानज्ञेयस्वरूपिण्या शक्त्या परमया युतः । पदद्वये विभुर्भाति तदन्यत्र तु चिन्मात्रः ॥१८॥
jñāna-jñeya-svarūpiṇyā śaktyā paramayā yutaḥ | pada-dvaye vibhur bhāti tad-anyatra tu cin-mātraḥ ||
anuṣṭubh
— ज्ञान और ज्ञेय (जानने योग्य) के स्वरूप वाली (के द्वारा) — करण कारक — समासगत ; — परा (सर्वोच्च) शक्ति के साथ — करण कारक ; — युक्त, सम्बद्ध (पु.कर्ता एक. ppp √यु) ; — दो पदों में (जाग्रत् और स्वप्न) — अधिकरण कारक — समासगत ; — विभु — सर्वव्यापक, ईश्वर (कर्ता कारक) ; — प्रकाशित होता है, भासित होता है (वर्त. तृ.पु.एक. √भा) ; — उससे अन्यत्र (सुषुप्ति-तुरीय आदि में) — अव्यय ; — किन्तु, परन्तु (विरोधार्थक अव्यय) ; — चिन्मात्र — केवल शुद्ध चैतन्य-रूप (कर्ता कारक — समासगत)

ज्ञान और ज्ञेय के स्वरूप वाली परा शक्ति से युक्त वह विभु (व्यापक प्रभु) दो पदों (जाग्रत्-स्वप्न) में भासित होता है; उनसे अन्यत्र (सुषुप्ति में) तो केवल चिन्मात्र (शुद्ध चैतन्य) रूप में।