The Vision of Śiva· 7.106 / 122

The Vision of Śiva7.106

7.106
भवति शिवमयात्मा सर्वभावेन सर्वः ॥१०६॥
bhavati śivamayātmā sarvabhāvena sarvaḥ
— हो जाता है ; — शिवमय आत्मा वाला ; — सर्व-भावत्व (सब होने) के कारण ; — प्रत्येक (जन)

प्रत्येक (जन), अपने सर्व-भावत्व (सब कुछ होने) के कारण, शिवमय आत्मा वाला हो जाता है।