The Vision of Śiva· 5.107 / 110

The Vision of Śiva5.107

5.107
सदाशिवात्मना वेत्ति घटः स च घटात्मना । सर्वे सर्वात्मका भावाः सर्वसर्वस्वरूपतः ॥१०७॥
sadāśivātmanā vetti ghaṭaḥ sa ca ghaṭātmanā | sarve sarvātmakā bhāvāḥ sarvasarvasvarūpataḥ
— सदाशिव के आत्मा से ; — जानता है ; — घट ; — और वह (सदाशिव) ; — घट के आत्मा से ; — समस्त ; — सर्व-आत्मक ; — भाव ; — सब-सब का स्वरूप होने से

घट सदाशिव के आत्मा से जानता है, और वह (सदाशिव) घट के आत्मा से; समस्त भाव सर्व-आत्मक हैं, प्रत्येक के सब-सब का स्वरूप होने से।