The Vision of Śiva· 3.91 / 99

The Vision of Śiva3.91

3.91
उपलादेर्जडत्वेऽपि शिवत्वं ते कथं स्थितम् ॥९१॥
upalāderjaḍatve'pi śivatvaṃ te kathaṃ sthitam
— पत्थर आदि की ; — जड़ता होने पर भी ; — शिवत्व ; — तुम्हारे (मत में) ; — कैसे ; — स्थित

(आक्षेप:) पत्थर आदि की जड़ता होने पर भी तुम्हारे (मत में) उसका शिवत्व कैसे स्थित होगा?