उपलादेर्जडत्वेऽपि शिवत्वं ते कथं स्थितम् ॥९१॥
upalāderjaḍatve'pi śivatvaṃ te kathaṃ sthitam
(आक्षेप:) पत्थर आदि की जड़ता होने पर भी तुम्हारे (मत में) उसका शिवत्व कैसे स्थित होगा?
(आक्षेप:) पत्थर आदि की जड़ता होने पर भी तुम्हारे (मत में) उसका शिवत्व कैसे स्थित होगा?