The Vision of Śiva· 3.90 / 99

The Vision of Śiva3.90

3.90
यत्रात्मानुभवानिष्ठा तत्रेच्छा च न किं भवेत् ॥९०॥
yatrātmānubhavāniṣṭhā tatrecchā ca na kiṃ bhavet
— जहाँ ; — अपने आत्मा के अनुभव में निष्ठा ; — वहाँ ; — इच्छा भी ; — नहीं ; — क्या (न हो) ; — होगी

और जहाँ (वह) अपने आत्मा के अनुभव में निष्ठ है, वहाँ भी क्या इच्छा नहीं होगी (होगी ही)?