3.37 करणशक्तिः स्वतोऽनुभवात् ॥३७॥ karaṇa-śaktiḥ svato 'nubhavāt sūtra karaṇa-śaktiḥ — करण-शक्ति — करण-शक्ति, सृजन की शक्ति (स्त्री. एकवचन, तत्पुरुष समास) ; svataḥ — स्वतः — स्वयं से, अपने आप (अव्यय, अपादान) ; anubhavāt — अनुभव से — (प्रत्यक्ष) अनुभव से (पुं. एकवचन, अपादान) (योगी की) करण-शक्ति (सृजन की शक्ति) स्वयं के अनुभव से (जानी जाती है)।