Parātrīśikā· 1.31 / 36

Parātrīśikā1.31

1.31
सर्वतत्त्वसुसम्पूर्णाम् सर्वावयवशोभिताम् । यजेद् देवीं महाभागा सप्तविंशतिमन्त्रिताम् ॥३१॥
sarvatattvasusampūrṇām sarvāvayavaśobhitām | yajed devīṃ mahābhāgā saptaviṃśatimantritām
— समस्त तत्त्वों से परिपूर्ण ; — अपने सभी अवयवों से सुशोभित ; — यजन करे, पूजा करे ; — देवी को ; — महाभागा — महान् भाग्यशालिनी (साधक) ; — सत्ताईस बार अभिमन्त्रित

महाभागा (साधक) देवी का यजन करे — जो समस्त तत्त्वों से परिपूर्ण, अपने सभी अवयवों से सुशोभित, सत्ताईस बार अभिमन्त्रित है।