Parātrīśikā· 1.32 / 36

Parātrīśikā1.32

1.32
ततः सुगन्धिपुष्पैश् च यथाशक्त्या समर्चयेत् । पूजयेत् परया भक्त्या स्वात्मनं च निवेदयेत् ॥३२॥
tataḥ sugandhipuṣpaiś ca yathāśaktyā samarcayet | pūjayet parayā bhaktyā svātmanaṃ ca nivedayet
— तब, तत्पश्चात् ; — सुगन्धित पुष्पों से ; — और ; — यथाशक्ति — सामर्थ्य के अनुसार ; — भली प्रकार अर्चना करे ; — पूजा करे, वन्दना करे ; — परम, सर्वोच्च ; — भक्ति से ; — अपने आप को, अपनी आत्मा को ; — और ; — निवेदित करे, समर्पित कर दे

तत्पश्चात् सुगन्धित पुष्पों से यथाशक्ति भली प्रकार अर्चना करे, परम भक्ति से पूजा करे, और अपने आप को (उसके प्रति) निवेदित कर दे।