Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.4 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.4

3.4
न कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोऽश्नुते । न च संन्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति ॥ ३-४ ॥
na karmaṇāmanārambhānnaiṣkarmyaṃ puruṣo'śnute | na ca saṃnyasanādeva siddhiṃ samadhigacchati || 3-4 ||
— कर्मों के आरम्भ न करने से नहीं ; — पुरुष निष्कर्मता को प्राप्त करता है ; — और न केवल संन्यास से ही ; — सिद्धि को प्राप्त करता है

कर्मों का आरम्भ न करने मात्र से पुरुष निष्कर्मता को प्राप्त नहीं करता, और न केवल संन्यास से ही सिद्धि को पाता है।