Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.48 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.48

2.48
कर्मण्यस्त्वधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन । मा कर्मफलहेतुभूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि ॥ २-४८ ॥
karmaṇyastvadhikāraste mā phaleṣu kadācana | mā karmaphalahetubhūrmā te saṅgo'stvakarmaṇi || 2-48 ||
— तेरा अधिकार केवल कर्म में ; — फलों में कभी नहीं ; — कर्मफल का हेतु मत बन ; — अकर्म में भी तेरी आसक्ति न हो

तुम्हारा अधिकार केवल कर्म में है, फलों में कभी नहीं; तुम कर्मफल के हेतु मत बनो, और तुम्हारी आसक्ति अकर्म में भी न हो।