द्वाविमौ पुरुषौ लोके क्षरश्चाक्षर एव च ।
क्षरः सर्वाणि भूतानि कूटस्थोऽक्षर उच्यते ॥
१५-१६ ॥
dvāvimau puruṣau loke kṣaraścākṣara eva ca |
kṣaraḥ sarvāṇi bhūtāni kūṭastho'kṣara ucyate ||
15-16 ||
लोक में ये दो पुरुष हैं — क्षर और अक्षर; क्षर समस्त भूत हैं, और कूटस्थ अक्षर कहलाता है।