Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 15.13 / 20

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)15.13

15.13
गामाविश्य च भूतानि धारयाम्यहमोजसा । पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः ॥ १५-१३ ॥
gāmāviśya ca bhūtāni dhārayāmyahamojasā | puṣṇāmi cauṣadhīḥ sarvāḥ somo bhūtvā rasātmakaḥ || 15-13 ||
— और पृथ्वी में प्रवेश करके भूतों को ; — मैं अपने ओज से धारण करता हूँ ; — और समस्त औषधियों को पुष्ट करता हूँ ; — रस-स्वरूप सोम (चन्द्र) होकर

और पृथ्वी में प्रवेश करके मैं अपने ओज से भूतों को धारण करता हूँ; और रस-स्वरूप सोम (चन्द्र) होकर मैं समस्त औषधियों को पुष्ट करता हूँ।