Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 14.13 / 27

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)14.13

14.13
अप्रकाशोऽप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च । तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे कुरुनन्दन ॥ १४-१३ ॥
aprakāśo'pravṛttiśca pramādo moha eva ca | tamasyetāni jāyante vivṛddhe kurunandana || 14-13 ||
— अप्रकाश और अप्रवृत्ति ; — प्रमाद और मोह ; — तमस् के बढ़ने पर ये उत्पन्न होते हैं ; — हे कुरुनन्दन

हे कुरुनन्दन, तमस् के बढ़ने पर अप्रकाश, अप्रवृत्ति, प्रमाद और मोह — ये उत्पन्न होते हैं।