Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 10.20 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)10.20

10.20
अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः । अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च ॥ १०-२० ॥
ahamātmā guḍākeśa sarvabhūtāśayasthitaḥ | ahamādiśca madhyaṃ ca bhūtānāmanta eva ca || 10-20 ||
— मैं आत्मा हूँ, हे गुडाकेश ; — समस्त भूतों के हृदय में स्थित ; — मैं आदि और मध्य ; — और भूतों का अन्त भी

हे गुडाकेश, मैं समस्त भूतों के हृदय में स्थित आत्मा हूँ; मैं ही भूतों का आदि, मध्य और अन्त भी हूँ।