Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 10.19 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)10.19

10.19
हन्त ते कथयिष्यामि विभूतिरात्मानः शुभाः । प्राधान्यतः कुरुश्रेष्ठ नास्त्यन्तो विस्तरस्य मे ॥ १०-१९ ॥
hanta te kathayiṣyāmi vibhūtirātmānaḥ śubhāḥ | prādhānyataḥ kuruśreṣṭha nāstyanto vistarasya me || 10-19 ||
— अच्छा, मैं तुझे बताऊँगा ; — अपनी शुभ विभूतियों को ; — प्रधानता के अनुसार, हे कुरुश्रेष्ठ ; — मेरे विस्तार का कोई अन्त नहीं

हे कुरुश्रेष्ठ, अच्छा, मैं अपनी शुभ विभूतियों को प्रधानता के अनुसार तुझे बताऊँगा; क्योंकि मेरे विस्तार का कोई अन्त नहीं।