1.21 सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत ॥ १-२१ ॥ senayorubhayormadhye rathaṃ sthāpaya me'cyuta || 1-21 || senayorubhayormadhye — दोनों सेनाओं के बीच ; rathaṃ sthāpaya — रथ खड़ा कीजिए ; me — मेरा ; acyuta — हे अच्युत (कृष्ण) और कहा — हे अच्युत, मेरे रथ को दोनों सेनाओं के बीच में खड़ा कीजिए,