Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 1.21 / 47

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)1.21

1.21
सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत ॥ १-२१ ॥
senayorubhayormadhye rathaṃ sthāpaya me'cyuta || 1-21 ||
— दोनों सेनाओं के बीच ; — रथ खड़ा कीजिए ; — मेरा ; — हे अच्युत (कृष्ण)

और कहा — हे अच्युत, मेरे रथ को दोनों सेनाओं के बीच में खड़ा कीजिए,